कोकून
उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Sunday, 29 December 2013
इन दिनों बारिशें मुझे नहीं भिगोतीं हैं
वो झीनी सी मासूमियत काफी हुई एक पैरहन के लिए .....!!
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment