प्रेम में संदेह से उपजी कड़वाहट को
नींद की गैर मौजूदगी में बहे आंसुओं में
उबाल कर देखो
तुम्हें लगेगा कि प्रेम का आसवन
हो ही नहीं सकता .....
या फिर ये कडवाहट
दरअसल यादों के खुरदरे आंगन की
गीली मिटटी में दबी निम्बोलियों की थी
जिसे वक़्त रहते बुहारने से पहले ही
आशंकाओं का तूफ़ान
तमाम दरख्तों की जड़ें हिला गया था ....!
नींद की गैर मौजूदगी में बहे आंसुओं में
उबाल कर देखो
तुम्हें लगेगा कि प्रेम का आसवन
हो ही नहीं सकता .....
या फिर ये कडवाहट
दरअसल यादों के खुरदरे आंगन की
गीली मिटटी में दबी निम्बोलियों की थी
जिसे वक़्त रहते बुहारने से पहले ही
आशंकाओं का तूफ़ान
तमाम दरख्तों की जड़ें हिला गया था ....!
No comments:
Post a Comment